भारत सरकार द्वारा संचालित विकास कार्यक्रम

भारत सरकार द्वारा संचालित विकास कार्यक्रम

सेवाएं, योजनाएं और प्रपत्र

ग्रामीण विकास कार्यक्रम और योजनाएं :

भारत सरकार, सभी स्तरों पर समय समय पर समाज के चहुमुखी विकास के लिए कल्याणकारी योजनाओं की घोषणा करती रहती है। यह योजनाएं केंद्र या राज्य सरकार की अथवा दोनों का संयुक्त प्रयास हो सकती हैं। इस प्रभाग में हम आपकी सुविधा के लिए ऐसी योजनाओं की जानकारी एक ही जगह पर उपलब्ध करा रहे हैं। योजनाओं की जानकारी, इनके लाभ, पात्रता की शर्तों आदि की जानकारी यहां से प्राप्त की जा सकती है।

ग्रामीण आधारभूत ढांचा विकास योजनाएं

ग्रामीण रोजगार योजनाएं

राजस्थान ऑनलाइन सेवाएं और फार्म

कल्याण

राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (एनएसएपी)) ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा संचालित एक कल्याणकारी कार्यक्रम है। इसे शहरी क्षेत्रों के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में लागू किया जा रहा है। यह बेरोजगारी, बुढ़ापा, बीमारी और विकलांगता आदि की स्थितियों में नागरिकों को सरकारी सहयोग प्रदान करता है।
एनएसएपी में निम्नलिखित पांच योजनाएं शामिल हैं: -

प्रशिक्षण और रोजगार

राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम

राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम 2005 (नरेगा)  के तहत एक वर्ष में 100 दिन का रोजगार हर घर के कम से कम एक सदस्य को प्रदान किया जाता है। प्रभावी ढंग से लागू किए गए नरेगा कार्यक्रम में गरीबी के नक्शे को बदलने की पूरी क्षमता मौजूद है। नरेगा का हाल ही में नाम बदल कर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम कर दिया गया है।
योजना के तहत रोजगार के लिए आवेदन पत्र   यहां से डाउनलोड करें।
जॉब कार्ड के बारे में जानकारी यहां देखी जा सकती है।
योजना के संबंध में अपनी शिकायत यहां दर्ज कराएं 

व्यावसायिक प्रशिक्षण

आवश्यक कार्य कौशल की कमी तथा प्रवेश योग्य औपचारिक योग्यता न होने के कारण गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाले युवा स्वरोजगार का कोई जरिया नहीं चुन पाते हैं। ग्रामीण स्व-रोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आर एस ई टी आई) कार्यक्रम  की पहल इसी जरूरत को देखते हुए की गई। ये संस्थान युवाओं को इस तरह प्रशिक्षित कर रहे हैं ताकि आगे चलकर वे स्वयं का व्यवसाय प्रारंभ कर सकें। ग्रामीण युवाओं के लिए खासतौर पर चलाए जा रहे इस कार्यक्रम के तहत शुल्करहित, अल्पावधिक आवासीय स्वरोजगार प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है। यहां प्रशिक्षुओं को आवास और भोजन निःशुल्क प्रदान किया जाता है।
अपने संबंधित राज्य के संस्थानों के पते के बारे में जानकारी यहां   देख सकते हैं।

स्व-रोजगार

स्वर्णजयंती ग्राम स्वरोजगार योजना(एसजीएसवाई) गरीब ग्रामीणों को स्वरोजगार प्रदान करने वाला एक एकीकृत कार्यक्रम है। योजना का उद्देश्य सहायता प्राप्त गरीब परिवारों को स्वसहायता समूह के रूप में संगठित कर गरीबी रेखा से ऊपर उठाना है। उन्हें अपना खुद का व्यवसाय प्रारंभ करने के लिए प्रशिक्षित किया गया है और उपयुक्त सहायता भी प्रदान की जाती है। योजना का निर्माण स्थानीय आवश्यकताओं को ध्यान में रख कर किया गया है।
स्वसहायता समूह के गठन और इसके अन्य पहलुओं के बारे में आवश्यक जानकारी यहां प्राप्त की जा सकती है।

स्वास्थ्य

आर्थिक और सामाजिक विकास में स्वास्थ्य के महत्व और जीवन की गुणवत्ता में सुधार के महत्व सरकार ने पहचाना है। इस दिशा में आवश्यक सुधार के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एन आर एच एम) की शुरुआत की गई है। इसका उद्देश्य ग्रामीण स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली में बुनियादी सुधार करना है। मिशन ने पोषण, सफाई, स्वच्छता और सुरक्षित पीने के पानी की उपलब्धता को स्वास्थ्य से संहबंधित किया है। बेहतर स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने के लिए ग्रामीण जीवन को भारतीय चिकित्सा प्रणाली की मुख्य धारा से जोड़ने का लक्ष्य रखा है।

एनआरएचएम के साथ जुड़े कुछ प्रमुख कार्यक्रम हैं: -

सफाई

अपने आस-पास को साफ रखकर और स्वच्छतापूर्वक रहने से बीमारियों को दूर रखने में मदद मिलती है। आप अपने-आप और आस-पड़ोस को बीमारियों से मुक्त रख सकते हैं इसके लिए आपको यहां (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) दी गई जानकारियों का पालन करना होगा।

महिलाओं के लिए जानकारी

पूरे परिवार को सेहतमंद रखने के लिए उस घर की महिला के स्वास्थ्य की देखभाल महत्वपूर्ण हो जाती है। विभिन्न परिस्थितियों में महिलाओं की स्वास्थ्य जरूरतें अलग-अलग तरह की होती हैं। इस विषय पर अधिक जानकारी यहां (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) देखी जा सकती है।

बच्चों की देखभाल

बच्चे के उचित देखभाल से संबंधित जानकारी आप यहां (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) देख सकते हैं।

आवास एवं विकास

ग्रामीण विकास विभाग (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) राज्य सरकारों के माध्यम से गरीबी उन्मूलन, रोजगार सृजन, ग्रामीण बुनियादी ढांचा विकास, न्यूनतम बुनियादी सेवाओं की व्यवस्था आदि के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यक्रम लागू कर रहा है।

जीवनस्तर

आवास

आवास ग्रामीण गरीबों के लिए सम्मानजनक जीवन का आधार है। आवास की कमी को सुलझाना भारत में ग्रामीण विकास और गरीबी उन्मूलन की महत्वपूर्ण रणनीति है। इंदिरा आवास योजना (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) द्वारा ग्रामीण विकास मंत्रालय ने ग्रामीण आवास कार्यक्रम लागू किया है। इस केंद्र प्रायोजित योजना में केंद्र और राज्यों के बीच लागत खर्च को 75:25 के आधार पर साझा किया जाता है। 1 अप्रैल 2008 से इस योजना के तहत प्रति लाभार्थी सहायता राशि 27500 रुपए से बढ़ाकर 38500 रुपए कर दी गई है। यह राशि बीपीएल परिवारों को नए मकान के निर्माण के लिए दी जा रही है। इस योजना के तहत लाभार्थियों का चयन ग्रामसभा करती है।
आप इस योजना का कैसे लाभ ले सकते हैं और बार-बार पूछे जाने वाले प्रश्न यहां (पीडीएफ फाइल जो नई विंडों में खुलती है)  देख सकते हैं।

विद्युतीकरण

ग्रामीण विद्युतीकरण नीति (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) के तहत 5 वर्षों के भीतर सभी घरों में बिजली पहुंचाने का प्रावधान है और इस उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए अप्रैल 2005 में विद्युतीकरण की चल रही सभी योजनाओं का विलय कर राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना(आरजीजीवीवाई) (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) शुरू की गई। ग्रामीण विद्युतीकरण निगम (आरईसी) (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) कार्यक्रम के लिए नोडल एजेंसी है।
आरईसी गांवों के विद्युतीकरण के लिए कई योजनाओं के तहत ऋण उपलब्ध कराता है। विवरण यहां (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) उपलब्ध है।
आरजीजीवीवाई से प्रभावित लोगों के लिए टिप्पणियां और सुझाव यहां (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) दे सकते हैं।

जल आपूर्ति

भारत सरकार त्वरित ग्रामीण जल आपूर्ति कार्यक्रम(एआरडब्ल्यूएसपी) (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षित पेय जल उपलब्ध कराने में राज्यों के प्रयासों में मदद की है। राजीव गांधी राष्ट्रीय पेयजल मिशन (पीडीएफ फाइल जो नई विंडों में खुलती है) पेयजल आपूर्ति विभाग (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) द्वारा राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम(एनआरडीडब्लयूपी) 2009-2012 (पीडीएफ फाइल जो नई विंडों में खुलती है)  के संसोधित दिशा निर्देश जारी किए गए हैं। इसमें गांव सुरक्षा योजना' के विकास पर ध्यान केंद्रित किया गया है जिसमें योजना से पहले गांव सुरक्षा और ग्रामीण परिवार को पर्याप्त और सुरक्षित पीने का पानी उपलब्ध कराने के लिए जलापूर्ति प्रणाली की स्थापना शामिल हैं।

स्वच्छता

संपूर्ण स्वच्छता अभियान (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन के सामान्य गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए शुरू किया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता कवरेज में तेजी लाने के लिए 2012 तक सभी के लिए शौचालय का उपयोग करने का लक्ष्य रखा गया है और इसमें पंचायती राज संस्थाओं व समुदायों को प्रेरित करके जागरूकता निर्माण और स्वास्थ्य शिक्षा द्वारा स्थायी स्वच्छता सुविधाओं को बढ़ावा देने को शामिल किया गया है। इस अभियान के कार्यान्वयन के लिए पेयजल आपूर्ति विभाग (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) , व्यापक दिशा निर्देश (पीडीएफ फाइल जो नई विंडों में खुलती है)  जारी किए हैं। ग्राम पंचायतों, प्रखंडों और जिलों को पूरी तरह साफ और खुले में शौच मुक्त बनाने के इस अभियान को व्यापक रूप से प्रोत्साहित करने के लिए 'निर्मल ग्राम पुरस्कार (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)'  शुरू किया गया है। पुरस्कार राशि ग्राम पंचायतों के लिए 50,000 से 5 लाख रुपए तक और प्रखंडों के लिए 20 लाख रुपए तक और जिलों के लिए 50 लाख रुपए तक है।
आप इससे संबंधित और अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं और यहां (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) से फॉर्म डाउनलोड कर सकते हैं।
संपूर्ण स्वच्छता की प्रगति रिपोर्ट राज्यवार यहां (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) देखी जा सकती है।

संपर्क

सड़कें

कृषि आय बढ़ाने और रोजगार अवसर पैदा करने के साथ गरीबी में कमी सुनिश्चित करने के लिए अच्छी सड़कें होना आवश्यक है। देश के 40 प्रतिशत बस्तियों को अभी भी बारहमासी सड़कों से नहीं जोड़ा जा सका है। इस स्थिति से निपटने के लिए सरकार ने 25 दिसंबर 2000 को प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना आरंभ (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) की। इसका मकसद दूरदराज के क्षेत्रों को बारहमासी सड़क के माध्यम से मुख्य सड़क से जोड़ना है। 2008- 2009 में इस कार्यक्रम के अंतर्गत विकास (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) में 470.4 किलोमीटर की कुल 215 नई सड़कें और कुल 4904.76 किलोमीटर के 1265 सड़कों का उन्नयन हुआ है। चालू वर्ष में चल रहे काम में (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) किलोमीटर) और 196 सड़कों का 1081 किलोमीटर का उन्नयन शामिल है। इस कार्यक्रम के आरंभ से अब तक की प्रगति रिपोर्ट (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)के अनुसार 39,492 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इसके अंतर्गत 1,63,985 बस्तियों को कवर किया गया है।
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के प्रभाव आकलन पर एक समेकित रिपोर्ट यहां (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) देखी जा सकती है।

दूरसंचार/सूचना प्रौद्योगिकी

आज संचार युग में शहर और कस्बे संचार और सूचना प्रौद्योगिकी से जुड़ गए हैं और देश के ग्रामीण हिस्सों में संपर्कों का विकास आवश्यक है। भारत निर्माण कार्यक्रम, के अंतर्गत, 2014 तक कम से कम 40% ग्रामीण दूरभाष घनत्व और सभी 2,50,000 ग्राम पंचायतों के ब्रॉडबैंड कवरेज और 2012 तक पंचायत स्तर पर भारत निर्माण सामान्य सेवा केन्द्रों की स्थापना की जाएगी। देश में 66,822 राजस्व गांवों में जहां अब तक ग्रामीण सार्वजनिक टेलीफोन (वीपीटी) उपलब्ध नहीं है, इसे कवर किया जाना सुनिश्चित किया जाएगा। इसके बाद दूर दराज के 14,183 गांवों को डिजिटल उपग्रह फोन टर्मिनल के माध्यम से जोड़ा जाएगा।
इन प्रयासों के अलावा भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) ग्रामीण टेलीफोन की पहुंच पर अपनी सिफारिशें   प्रस्तुत की हैं। इसमें निजी सेवा प्रदाताओं के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क बढ़ाने के उपाय/प्रोत्साहन सहित ग्रामीण दूरसंचार में पैठ बढ़ाने के ठोस उपायों और इसकी रास्ते में आ रही बाधाओं पर चर्चा की गई है।

आजीविका

गांवों के अधिकांश लोग अपनी आजीविका कृषि या हस्तशिल्प से अर्जित करते हैं। चूंकि हर परिवार के पास उपलब्ध भूमि का स्थिर रहा है और उसके सदस्यों की संख्या में लगातार वृद्धि होती रही है। उतनी ही जमीन से सभी का भरण-पोषण कर पाना एक मुश्किल काम है। इस कारण रोज़गार की तलाश में लोग कस्बों और शहरों की तरफ रुख कर रहे हैं लेकिन आवश्यक योग्यता के अभाव में कई बार उन्हें रोजगार पाने में कठिनाई का सामना करना पड़ता है। सरकार इन समस्याओं को दूर करने के लिए नई कृषि तकनीकों के प्रयोग द्वारा उसी भूमि से उत्पादन की मात्रा बढ़ाने के साथ-साथ गांव के भीतर या समीप ही में रोज़गार और जीविकोपार्जन के अन्य अवसर उपलब्ध कराने के प्रयास कर रही है। युवाओं को प्रशिक्षण प्रदान कर और वित्तीय सहायता के द्वारा स्वयं का व्यवसाय शुरू करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

कृषि

राष्ट्रीय कृषक नीति   का शुभारंभ कृषि और सहकारिता विभाग, कृषि मंत्रालय  द्वारा सितंबर 2007 में किया गया। इस नीति का लक्ष्य किसानों की शुद्ध आय में बढ़ोत्तरी करना और उन्हें उनकी फसलों का अच्छा मूल्य दिलाना है। सरकार भूमि और जल सुविधाओं के विकास के लिए काम कर रही है। विभाग कृषि के मशीनीकरण के लिए भारतीय कृषि सांख्यिकी शोध संस्थान  के द्वारा एक अध्ययन भी करवा रहा है।
इस नीति के तहत मंत्रालय के पास किसानों के लाभ के लिए बहुत से कार्यक्रम और योजनाएं हैं। इनमें से कुछ योजनाएं किसानों को प्रत्यक्ष और कुछ अन्य अप्रत्यक्ष रूप से लाभ प्रदान करती हैं।
  • बीज उपचार अभियान  के द्वारा सरकार उपचारित बीज किसानों को उपलब्ध कराती है। ये उपचारित बीज अधिक उपज तो देते ही हैं साथ बीमारियों और कीटों के खिलाफ संघर्ष करने की क्षमता भी इनमें अधिक होती है। इस योजना में रुचि रखने वाले किसान अपने प्रदेश के संपर्क स्थल के बारे में जानकारी यहां (पीडीएफ फाइल जो नई विंडों में खुलती है)  प्राप्त कर सकते हैं।
  • सरकार कृषि आधारित व्यवसाय के द्वारा आय प्राप्त करने के लिए किसानों द्वारा गठित सहकारी समितियों को अनुदान प्रदान करती है। अनुदान के लिए लघु किसान कृषि व्यवसाय संघ के माध्यम से आवेदन किया जा सकता है।
  • अपनी फसलों की कीटों से सुरक्षा करने के लिए समन्वित कीट प्रबंधन योजना की सहायता ली जा सकती है।
  • किसी कारणवश फसल को होने वाली क्षति या नुकसान से किसानों की रक्षा करने के लिए राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना (एन ए आई एस) प्रारंभ की गई है।

ग्रामीण विकास

पशुपालन

गांवों में खासतौर पर भूमिहीन मजदूरों, लघु और सीमांत किसानों और महिलाओं को रोजगार प्रदान करने तथा उनकी पारिवारिक आय बढ़ाने में पशुपालन, डेयरी विकास और मत्स्य पालन महत्वपूर्ण योगदान देत हैं। इसके कारण सस्ता और पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थ भी बहुत से लोगों को उपलब्ध होता है। पशुधन के क्षेत्र में अच्छी नस्ल की जानकारी का अभाव, उचित दाने-चारे की जानकारी की कमी और उपलब्धता आदि के बारे में पर्याप्त ज्ञान का अभाव प्रमुख समस्याएं रही हैं। पशुधन के देख-रेख, स्वास्थ्य के बारे में ग्रामीणों में जानकारी का अभाव है और उत्पादन में लगे लोगों को उत्पाद की उचित कीमत भी नहीं मिल पाती है। राष्ट्रीय कृषक नीति  के माध्यम से इन मुद्दों के समाधान की परिकल्पना की गई है।
चूंकि कृषि जिसमें पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन शामिल है, राज्य सरकारों के अधीन आने वाला विषय है, इसलिए पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन विभाग  का जोर राज्य सरकारों द्वारा इन क्षेत्रों में विकास के लिए चलाए जा रहे कार्यक्रमों को अतिरिक्त सहायता देने का रहा है। इन क्षेत्रों में चलाई जा रही कुछ प्रमुख योजनाएं इस प्रकार हैं -

केन्द्र द्वारा प्रायोजित योजनाएं

ग्रामीण विकासः डेयरी विकास:

केन्द्र प्रायोजित योजनाएं

ग्रामीण विकासः मत्स्य पालन

केन्द्र द्वारा प्रायोजित परियोजनाओं

वित्त

बीजों, कृषि मशीनों तथा भूमि की खरीदी के लिए तथा अन्य आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए किसानों को साख की जरूरत होती है। साहूकारों के शिकंजे मे फंसने से बचने से अच्छा है कि सरकारी योजनाओं के माध्यम से प्रदान की जा रही साख सुविधाओं का लाभ उठाया जाए।
राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) कृषि और ग्रामीण क्षेत्रों में विकास के लिए काम करने वाला सबसे बड़ा बैंक है।
कृषि भूमि खरीदने हेतु प्रदान किए जाने वाले ऋण के बारे में अधिक जानकारी यहां देखें।
विभिन्न केंद्रीय बैंकों द्वारा किसानों और ग्रामीणों को उपलब्ध कराए जा रहे विभिन्न प्रकार के ऋणों के बारे में जानकारी (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)यहां देखी जा सकती है।
अल्पावधि की जरुरतों को पूरा करने के लिए किसानों को साख उपलब्ध कराने के लिए किसान क्रेडिट कार्ड योजना चालू की गई है। इस योजना के बारे में अधिक जानकारी (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) यहां देखी जा सकती है।

बीमा

विपत्तियां, अप्रत्याशित आपदाएं और दुर्घटनाएं किसी भी समय हो सकती हैं। इनके कारण एक आदमी का जीवन और आजीविका के साधन दोनों ही अस्त-व्यस्त हो जाते हैं। ग्रामीण क्षेत्र विशेष रूप से ऐसे अवरोधों के लिए अतिसंवेदनशील होते हैं, इनके असर से उबरने में ग्रामीण भागों को लंबा समय लग सकता है। सरकार ने ऐसे किसी खतरे से राहत के लिए इन क्षेत्रों के लिए विशेष योजनाओं का निर्माण किया है। ये योजनाएं विशेष रूप से इन क्षेत्रों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बनाई गई हैं। डाक जीवन बीमा और कृषि बीमा योजनाएं ग्रामीण क्षेत्रों की खास जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाई गई हैं।

ग्रामीण विकासः डाक जीवन बीमा योजना

डाक विभाग ने पांच जीवन बीमा योजनाएं विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों के लिए प्रारंभ की हैं। ये योजनाएं ग्रामीण क्षेत्र की बीमा आवश्यकताओं को काफी हद तक पूरा करती हैं। ये बीमा योजनाएं हैं: -

कृषि बीमा

राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना   (एन ए आई एस) कृषि के क्षेत्र में जोखिम प्रबंधन के एक भाग के रूप में लागू की जा रही एक केन्द्रीय योजना है। यह प्राकृतिक आपदाओं, कीट और रोग की वजह से फसलों को हानि पहुंचने की स्थिति में किसानों को वित्तीय सहायता प्रदान करती है। यह योजना सभी प्रकार के किसानों के लिए उपलब्ध है, भले ही उनकी जोत का आकार कुछ भी क्यों न हो। इस बीमा योजना के तहत ऐसी सभी खाद्य फसलें) अनाज, जौ और दालें, )तिलहन और वार्षिक वाणिज्यिक/बागवानी फसलें आदि सम्मिलित की गई हैं, जिनकी पैदावार के संबंध में पिछले कुछ साल के आंकड़े उपलब्ध हैं। प्रीमियम दर 1.5% और 3.5% प्रतिशत के मध्य (बीमा राशि का) खाद्य और तिलहनी फसलों के लिए होता है। जबकि व्यावसायिक/बागवानी फसलों के संबंध में बीमांकिक दरें लागू होती हैं। इस योजना के तहत वर्तमान में प्रीमियम में 10% की सब्सिडी छोटे और सीमांत किसानों के लिए उपलब्ध है।
अन्य फसलों और पशुधन के बीमा से जुड़ी योजनाओं के बारे में सविस्तार जानकारी यहां (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) देखी जा सकती है।

साभार - india.gov.in

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