रबी मौसम फसल बीमा योजना

रबी मौसम (2009-10) हेतु मौसम आधारित फसल बीमा योजना (WBCIS)

योजना के अंतर्गत आनेवाले राज्य
इस योजना को निम्न 20 राज्यों में लागू किये जाने का प्रस्ताव है। ये राज्य हैं- आँध्र प्रदेश, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, मेघालय, उड़ीसा, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल।
योजना के लक्ष्य
इस योजना का लक्ष्य वर्षा की कमी या अधिकता जैसे विपरीत मौसम की स्थिति में होनेवाले दुर्घटना के फलस्वरूप प्रत्याशित आर्थिक क्षति की संभावनाओं से बचाव करना है



योजना की प्रमुख विशेषता
  • रबी मौसम में गैर-मौसमी वर्षा, ताप, कुहासा, आर्द्रता आदि जैसे मापदंड कुछ ऐसे कारक हैं जो फसल को बुरी तरह प्रभावित करते हैं।
  • यह योजना रबी मौसम के दौरान होने वाले प्रमुख अनाज, बाजरा, दाल, तिलहन और व्यापारिक/बागवानी फसलों पर लागू होगी।
  • कर्जदार या कर्जहीन सभी प्रकार के किसान इस योजना के तहत लाभ पाने के हकदार होंगे। कर्जदार किसान के लिए बीमा आवश्यक होगी जबकि कर्जहीन के लिए यह वैकल्पिक होगी।
  • यह योजना भारतीय कृषि बीमा कंपनी लिमिटेड (AIC) और निजी बीमा कंपनी अर्थात् आईसीआईसीआई-लॉम्बार्ड जेनरल बीमा कंपनी, ईफको-टोकियो जेनरल बीमा कंपनी और चोलामंडलम् एमएस जेनरल बीमा कंपनी द्वारा लागू की जाएगी।
  • योजना में भाग लेने वाले सभी बीमा कंपनियों (सरकारी और निजी) को कर्जदार व कर्जमुक्त किसानों के लिए इस योजना को लागू करने की अनुमति दी जाएगी।
  • जिन क्षेत्रों में मौसम आधारित फसल बीमा योजना लागू की जाएगी उसे बाद में सूचित किया जाएगा।
  • जिन क्षेत्रों में मौसम आधारित फसल बीमा योजना लागू की गई है उस क्षेत्र के कर्जदार  किसानों के लिए राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना (NAIS) लागू नहीं की जाएगी। हालांकि कर्जहीन किसान राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना और मौसम आधारित फसल बीमा योजना और बीमा कंपनी में से किसी एक को चुन सकते हैं।
  • कर्जदार किसानों के लिए उनकी पसंद/प्राथमिकता को ध्यान में रखते हुए संबंधित राज्य प्रत्येक कार्यकारी एजेंसी के लिए योजना के कार्यान्वयन क्षेत्र निर्धारित करेगा। मेसर्स चोलामंडलम् एमएस जेनरल बीमा कंपनी को अन्य कार्यकारी एजेंसी के अलावा सिर्फ तमिलनाडु और झारखंड राज्य के लिए कार्य करेंगे।
  • प्रीमियम दर, शुल्क, जोखिम कवरेज, कुल बीमा राशि, दावों के भुगतान और प्रीमियम सब्सिडी के संबंध में बीमा कंपनियाँ, बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण से अनुमोदन के बाद और भारत सरकार द्वारा समय-समय पर जारी दिशा-निर्देंशों के अनुरूप करेगा।
  • बीमा राशि की अधिकतम सीमा, जो कि लगभग खेती में कुल लागत के बराबर होगा, बनाये रखने के लिए कर्जहीन किसान को यह सुविधा होगी कि वे अधिकतम सीमा के अंदर छोटी राशि के लिए बीमा करवाये। लेकिन यह बीमा राशि अधिकतम सीमा के 50% से नीचे नहीं होनी चाहिए।
  • प्रीमियम के बीमांकन (एक्चुरियल) दर का निर्धारण प्रामाणिक प्रीमियम रेटिंग विधि द्वारा कृषि बीमा कंपनी (एआईसी) सहित सभी बीमा कंपनियों द्वारा किया जाएगा और अनाज फसल व तिलहन के लिए दर 8% की सीमा निर्धारित की गई है। रबी मौसम में राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना के वर्तमान दर के अनुसार अनाज व तिलहन फसल के लिए किसान मूलतः प्रीमियम का भुगतान करेंगे। अनाज व तिलहन फसल के संदर्भ में बीमांकन दर और उचित दर के बीच का अंतर, केंद्र और राज्य सरकार के बीच 50:50 अनुपात में बाँटा जाएगा।
  • वार्षिक व्यापारिक/बागवानी फसलों के मामलों में किसानों द्वारा भुगतान किये जाने वाले 6% की अधिकतम सीमा को निम्नानुसार प्रदर्शित किया गया हैः

क्रम संख्या प्रीमियम खंड केंद्र और राज्य सरकार द्वारा 50:50 अनुपात में सब्सिडी और किसान द्वारा भुगतान किये जाने वाले प्रीमियम
1 2% तक कोई सब्सिडी नहीं
2 > 2 - 5% किसान द्वारा भुगतान किये जानेवाले न्यूनतम 2% शुद्ध प्रीमियम के अधीन 25% सब्सिडी।
3 > 5-8 % किसान द्वारा भुगतान किये जानेवाले न्यूनतम 3.75% शुद्ध प्रीमियम के अधीन 40% सब्सिडी।
4 > 8% किसान द्वारा भुगतान किये जानेवाले न्यूनतम 4.8% शुद्ध प्रीमियम के अधीन 50% सब्सिडी।

  • वार्षिक व्यापारिक/बागवानी फसलों के मामलों में प्रीमियम के बीमांकन दर की 12% की सीमा लागू होगी।
  • बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण के विनियमों के अनुसार जोखिम कवरेज को स्वीकार्य बनाने के लिए निजी बीमा कंपनियाँ (आईसीआईसीआई-लॉम्बार्ड, ईफ्फको-टोकियो और चोला एमएस) कृषि बीमा कंपनी से निधि (प्रीमियम का सब्सिडी भाग) प्राप्त कर सकती हैं और बाद में कृषि बीमा कंपनी वह राशि भारत सरकार व संबंधित राज्य सरकार से प्राप्त करेगी।  
  • सभी प्रकार के दावों का उत्तरदायित्व संबंधित बीमा कंपनियों का होगा।
  • निजी बीमा कंपनियाँ उसी स्तर के सब्सिडी के लिए पात्र होंगे जो कि कृषि बीमा कंपनी के लिए लागू होगा और यह उसे कृषि बीमा कंपनी के माध्यम से प्राप्त होगा।
स्रोतः http://agricoop.nic.in

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