नौ फीसदी को छूती तेज आर्थिक वृद्धि दर


नौ फीसदी को छूती तेज आर्थिक वृद्धि दर

         
साल की दूसरी तिमाही के दौरान आर्थिक वृद्धि के आंकड़ों ने अनुमानों को पीछे छोड़ दिया है। प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद और भारतीय रिजर्व बैंक दोनों ने 8.5 फीसदी की वृद्धि का अनुमान व्यक्त किया था। लेकिन जुलाई से सितंबर के जो आंकड़े केंद्रीय सांख्यिकी संगठन ने जारी किए हैं, वे 8.9 फीसदी वृद्धि की कहानी कह रहे हैं। यह खुशखबर है। पहली तिमाही में ठीक इतनी ही वृद्धि दर दर्ज की गई थी, जिसे दूसरी तिमाही में भी हमने कायम रखा है। इसका अर्थ है कि राजनीतिक झंझावातों के बीच भी आर्थिक सेहत दुरुस्त है। 


इतना ही महत्वपूर्ण यह कि इस बार आर्थिक वृद्धि का आधार पहले से ज्यादा व्यापक हुआ है और सभी प्रमुख क्षेत्रों में अच्छी वृद्धि दर्ज की गई है। इसका सबसे ज्यादा श्रेय कृषि के प्राथमिक क्षेत्र को है, जिसमें इस बार अच्छी उछाल देखी गई। कृषि उत्पादन 0.9 फीसदी से बढ़कर 4.4 फीसदी हो गया है। यह मुख्यत: अच्छी खरीफ फसलों के कारण हुआ है। मैन्यूफैक्चरिंग और कंस्ट्रक्शन अब काफी समय से हमारी अर्थव्यवस्था के मजबूत आधार हैं। 



पहली तिमाही में भी इन दोनों क्षेत्रों में 8.4 प्रतिशत और 8.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी, जो इस बार बढ़कर 9.8 और 8.4 प्रतिशत हो गई है। सेवा क्षेत्र में थोड़ा-सा धक्का लगा है। वित्तीय सेवाओं व रियल एस्टेट सेक्टर में तीन फीसदी और सामुदायिक व सामाजिक सेवाओं में करीब सात फीसदी का उतार देखा गया है। अलबत्ता ट्रेड, होटल, ट्रांसपोर्ट और संचार में 8.2 से 12.1 की वृद्धि ने थोड़ी भरपाई जरूर की है।



ठीक इन्हीं दिनों एशिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं जापान और दक्षिण कोरिया की आर्थिक वृद्धि के आंकड़े उत्साहजनक नहीं हैं। कई खासकर यूरोपीय देशों की अर्थव्यवस्थाओं में भी सुस्ती देखी जा रही है। ऐसे में आर्थिक वृद्धि के इन आंकड़ों का एक सीधा असर यह होगा कि भारत विदेशी पूंजी निवेश के लिए आकर्षक बाजार बना रहेगा। दूसरी ओर, रिजर्व बैंक को मुद्रास्फीति की बढ़ती चुनौती से जूझना होगा, क्योंकि तेज रफ्तार वृद्धि का एक नतीजा महंगाई के रूप में सामने आएगा।



इन आंकड़ों से उत्साहित विशेषज्ञ इस वर्ष 9 फीसदी से ऊपर आर्थिक वृद्धि का अनुमान व्यक्त कर रहे हैं। लेकिन यह वृद्धि आत्मसंतोष का कारण नहीं होनी चाहिए। अगले वर्षो में अगर हमें 10 फीसदी से ऊपर वृद्धि का लक्ष्य हासिल करना है, तो आर्थिक सुधार जारी रखने होंगे और व्यवस्था में चुस्ती लाने के लिए जरूरी कदम उठाने होंगे। 
Source : ABHIVYAKTI (Dainik Bhaskar)

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