लैप्स पालिसी को दें नया जीवन - साभार : राष्ट्रीय सहारा



  लैप्स पालिसी को दें नया जीवन  

देवेन्द्र शर्मा

एक निश्चित तिथि के बाद प्रीमियम जमा नहीं होने पर बीमा पालिसी लैप्स हो जाती है। इस पालिसी को सरेंडर करने पर बहु त ही मामू ली रकम हाथ लगती है । यदि आप पुरानी पालिसी सरेंडर करके कोई नई पालिसी खरीदने की योजना बना रहे हैं तो एक बार नफा-नुकसान का गुणा-भाग जरूर करें। ज्यादातर मामलों में नई पालिसी खरीदने की तुलना में लैप्स पालिसी को फिर से शुरू कराना बेहतर कदम साबित होता है।

महंगाई के दौर में बीमा पालिसी लैप्स होना कोई नई बात नहीं है। निवेश के उद्देश्य से खरीदी गई पालिसी शुरुआती वष्राे में लैप्स हो जाती है तो सरेंडर करने की स्थिति में प्रीमियम के रूप में जमा की गई राशि का कुछ हिस्सा ही हाथ लग पाता है। इस स्थिति में बीमा कंपनी आपकी कुल जमा रकम में से पूरी अवधि की लागत वसूल कर लेती है। इसमें एक बड़ा हिस्सा एजेंट के लिए किए गए भुगतान का होता है। पेडअप वैल्यू हाथ लगने के बाद आपके पास सिवाय पछताने के और कोई चारा नहीं बचता। यदि आपकी कोई पालिसी लैप्स हो रही है तो उसे रिन्यू कराने की हरसंभव कोशिश करें।

क्या है व्यवस्था

किसी भी बीमा पालिसी पर प्रीमियम जमा करने के लिए ग्रेस पीरियड मिलता है। आमतौर पर यह अवधि प्रीमियम के तिमाही, अर्धवाषिर्क या सालाना विकल्प पर निर्भर करती है। सालाना प्रीमियम के भुगतान की स्थिति में ग्रेस पीरियड की अवधि एक महीने की होती है। ग्राहकों को आकषिर्त करने के लिए बीमा कंपनियों ने इसके अलग-अलग मानक बना रखे हैं। यदि किसी पालिसी पर एक महीने का ग्रेस पीरियड मिलता है तो आपको 30 दिन तक बीमा कवर मिलेगा। इसके बाद प्रीमियम जमा न होने पर आपकी पालिसी लैप्स हो जाएगी और आपका कवर समाप्त हो जाएगा। हालांकि यूलिप के मामले में बीमा कंपनियां कुछ नरम रुख अपनाती हैं।


लैप्स होने का कारण

कई बार बीमा एजेंट संबंधों की दुहाई देकर पालिसी खरीदने के लिए दबाव बना देते हैं। तमाम पहलुओं पर विचार करने के बाद लोग पालिसी खरीद लेते हैं लेकिन उसके नियम और शर्ताे पर ध्यान नहीं देते। बाद में पता चलता है कि यह प्लान तो कोई खास उपयोगी नहीं है। ऐसे में कई लोग प्रीमियम देना बंद कर देते हैं। बीमा एजेंट को पहले प्रीमियम पर मोटा कमीशन मिलता है। इसके बाद वह पालिसी की जिम्मेदारी ग्राहक पर छोड़ देते हैं। बहुत से लोगों को यह याद भी नहीं रहता कि उन्हें बीमा का प्रीमियम जमा कराना है। जब तक पता चल पाता है तब तक काफी देर हो चुकी होती है। पालिसी लैप्स होने का एक और कारण है टैक्स बचत का लालच। कई बार लोग इनकम टैक्स बचाने के लिए फरवरी-मार्च में पालिसी तो खरीद लेते हैं लेकिन उसे ज्यादा दिन तक चला नहीं पाते। बीमा पालिसी लैप्स होने का सबसे बड़ा कारण है महंगाई। इसने लोगों का बजट बुरी तरह बिगाड़ दिया है। तमाम प्रयासों के बावजूद लोग प्रीमियम का जुगाड़ नहीं कर पाते। ऐसे लोगों को मजबूरी में पालिसी सरेंडर करानी पड़ती है।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ

आप्टिमा इंश्योरेंस ब्रोकर्स के सीईओ राहुल अग्रवाल के मुताबिक नई पालिसी खरीदते समय आपको पुरानी लैप्स के रिन्युअल में होने वाले खर्च के साथ तुलनात्मक अध्ययन जरूर करना चाहिए। ज्यादातर मामलों में लैप्स पालिसी को दोबारा शुरू कराने में ही फायदा होता है। दरअसल बीमा कंपनियां आपकी उम्र के हिसाब से प्रीमियम का निर्धारण करती हैं। यदि आपने 28 साल की उम्र में कोई पालिसी 15 साल के लिए खरीदी है तो उसका वाषिर्क प्रीमियम 10,000 रुपए है और आप इतने ही समएश्योर्ड की पालिसी 35 साल की उम्र में लेते हैं तो यह बढ़कर 13-14 हजार रुपए तक पहुंच सकता है। दूसरा सबसे बड़ा नुकसान यह है कि जो पालिसी 2015 में मैच्योर हो रही थी, नई पालिसी की स्थिति में आपको सात साल और इंतजार करना पड़ेगा। इसीलिए बेहतर यही है कि यदि पेनाल्टी भी भरनी पड़े तो आपको पुरानी पालिसी को ही रिन्यू कराना चाहिए। हालांकि टर्म इंश्योरेंस की स्थिति में इसमें कोई खास अंतर नहीं पड़ता क्योंकि इस पालिसी में आपको कोई सरेंडर वैल्यू नहीं मिलती और न ही इस पर कोई रिटर्न मिलता है।

कैसे कराएं रिन्यू

किसी बीमा पालिसी को भुगतान की तिथि से छह माह के भीतर रिन्यू कराया जाता है तो कंपनी बकाया प्रीमियम और उस पर ब्याज लेकर पालिसी दोबारा से चालू कर देगी। प्रीमियम पर ब्याज की दर पालिसी शुरू होने की तिथि पर निर्भर करती है। प्रीमियम की तिथि से छह माह से ज्यादा का समय गुजर जाने पर बीमा कंपनी आपसे स्वास्थ्य संबंधी शपथ पत्र भी मांगेगी। इसके अलावा स्वास्थ्य की जांच कराने के लिए भी कहा जा सकता है। रिपोर्ट सही आने पर ब्याज के साथ प्रीमियम राशि जमा करके पालिसी रिन्यू कराई जा सकती है। कई मामलों में कंपनी आपके प्रीमियम की राशि भी बढ़ा सकती है।

कितना बीमा कवर जरूरी

बजाज कैपिटल के सीईओ अनिल चोपड़ा के मुताबिक 40 साल की आयु तक के लोगों के लिए सालाना इनकम का सात गुना बीमा कवर आदर्श माना जाता है। इससे अधिक की आयु के लोगों के लिए यह कवर छह गुना होना चाहिए। हालांकि किस व्यक्ति को कितने कवर की जरूरत है, यह कई बिंदुओं पर निर्भर करता है। यदि पालिसी धारक को कुछ हो जाता है तो उसकी अनुपस्थिति में परिजनों को कितने धन की जरूरत है। इसके लिए मौजूदा खर्चाे और भविष्य की जरूरतों का आकलन करना होगा। यदि किसी व्यक्ति की आयु 25 साल है और सालाना इनकम तीन लाख रुपए है तो उसे 20 लाख रुपए का बीमा कवर जरूर लेना चाहिए। इसमें दस लाख रुपए के कवर का एंडोमेंट प्लान और दस लाख का टर्म प्लान शामिल किया जा सकता है। याद रखिए टर्म प्लान ही विशुद्ध बीमा है जो सबसे सस्ता पड़ता है।

और क्या करें

यदि आपको भूलने की आदत है तो ईमेल और एसएमएस अलर्ट के लिए रजिस्ट्रेशन करा लें
इससे बीमा कंपनी आपको समय-समय पर प्रीमियम भुगतान के लिए याद दिलाती रहेगी
पुरानी पालिसी रिन्यू कराने के लिए बीमा कंपनियां लोन की सुविधा भी देती हैं। आप भी इस सुविधा का लाभ उठा सकते हैं
कोई भी बीमा पालिसी दबाव में न लें। आमतौर पर बेमन से खरीदी गई पालिसियां लैप्स हो जाती हैं
पालिसी खरीदने से पहले निवेश के बजाय भविष्य की सुरक्षा जरूरतों पर मंथन करें
प्रीमियम जमा करने के लिए सिर्फ ग्रेस पीरियड का इंतजार न करें। इससे आपको कई तरह के नुकसान हो सकते हैं
सुरक्षा कवर के लिए खरीदी गई पालिसी को पूरी अवधि तक चलाने का संकल्प लें।

सबसे सस्ता टर्म प्लान

उम्र : 25 साल, टर्म : 20 साल, कवर 10 लाख बीमा कंपनी प्लान वाषिर्क प्रीमियम एजॉन रेलीगेयर आई टर्म Rs 1500/- टाटा एआईजी लाइफ रक्षा Rs 2080/- मैक्स न्यूयार्क लेवल टर्म Rs 2220/- एचडीएफसी स्टैंडर्ड टर्म एश्योरेंस Rs 2453/- एलआईसी अनमोल जीवन Rs 2544/- भारती एक्सा सिक्योर Rs 2620/- एसबीआई लाइफ शील्ड Rs 2650/- बजाज एलियांज न्यू रिस्क केयर Rs 2735/- आईसीआईसीआई प्रू प्योर प्रोटेक्ट Rs 2860/- मैट लाइफ सुरक्षा प्लस Rs 3166/- बिरला सनलाइफ टर्म प्लान Rs 3188/-


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