एम्स से एमबीबीएस

एम्स से एमबीबीएस

- विजय झा 
डॉक्टर का पेशा समाज में हमेशा से सम्माननीय रहा है, क्योंकि समाज में डॉक्टर अपने चिकित्सकीय ज्ञान के सहारे बीमारियों, विकृतियों व चोटों से बचने, उनका निदान करने का प्रयास करते हैं। उनके काम करने का समय निर्धारित नहीं होता। वे अस्पताल या क्लीनिक में आए मरीजों को परामर्श देते हैं, जांच करते हैं, सर्जरी करते हैं और किसी भी समय मरीज को तकलीफ होने पर देखते हैं। ऊपरी तौर पर लोग देखते हैं कि एक डॉक्टर खूब पैसे कमा रहा है और काफी व्यस्त रहता है, किन्तु इसके पीछे उसकी मेहनत कितनी है, समर्पण कितना है, उदास क्षणों को झेलने का दम कितना है, मरीज की मौत पर विचलित न होने का विवेक कितना है, यह भी देखा व समझा जाना जरूरी है। यदि आप में ऐसा करने का दमखम है तो बेशक आप इस पेशे को अपना सकते हैं। हाल ही में एम्स ने एमबीबीएस की पढाई के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। यदि बारहवीं में 60 प्रतिशत अंक हैं, तो आप 15 मार्च तक आवेदन कर सकते हैं।  
योग्यता तथा उम्र
प्रवेश परीक्षा में बैठने की पहली शर्त है कि अभ्यर्थी की न्यूनतम उम्र सत्रह साल हो। अभ्यर्थी ने सीनियर सेकेंडरी परीक्षा 10+2 पैटर्न पर इंग्लिश, फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी विषयों के साथ पास की हो। साथ ही इन चारों विषयों में सामान्य और पिछडे वर्ग के अभ्यर्थियों के कम से कम 60 फीसदी अंक हों।
 
परीक्षा का स्वरूप
प्रवेश परीक्षा हिंदी या फिर अंग्रेजी, किसी भी भाषा में दी जा सकती है। आप जिस भाषा में परीक्षा देना चाहते हैं, उसका उल्लेख एप्लिकेशन फॉर्म भरते समय करना होगा। एक बार फॉर्म भरने के बाद परीक्षा की भाषा में किसी तरह का परिवर्तन नहीं कराया जा सकता। साढे तीन घंटे की इस प्रवेश परीक्षा में कुल 200 प्रश्नों के उत्तर देने होते हैं। जिसमें फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी से 60-60 सवाल पूछे जाते हैं और 20 सवाल जनरल नॉलेज से संबंधित होते हैं।
 
स्मार्ट स्ट्रेटेजी से बनेगी बात
एम्स मेडिकल एंट्रेंस में कुछ खास खंडों से अधिक प्रश्न पूछे जाते हैं। इसके लिए पिछले वर्षो के प्रश्नपत्रों का विश्लेषण कर पैटर्न को जानें-समझें और फिर प्रश्नों को हल करने का जमकर अभ्यास करें। जरूरत हो, तो कोई विश्वसनीय कोचिंग भी ज्वाइन कर सकते हैं। इससे आपको सही पैटर्न पर तैयारी करने में मदद मिलेगी। इस परीक्षा का बैकग्राउंड 10+2 के फंडामेंटल्स पर ही आधारित है, इसलिए इस पर अपनी मजबूत पकड बनाएं। चूंकि यह परीक्षा पूरी तरह ऑब्जेक्टिव बेस्ड है, इसलिए ऑब्जेक्टिव प्रश्नों की खूब प्रैक्टिस करनी चाहिए। उन पोर्शन्स की पहचान करें, जिनसे ज्यादा प्रश्न पूछे जाते हैं।
 
न्यूमेरिकल्स हैं महत्वपूर्ण
फिजिक्स में बेहतर करने के लिए जरूरी है कि ज्यादा से ज्यादा फॉर्मूले तैयार करें। इसमें न्यूमेरिकल्स पर विशेष ध्यान दें। केमिस्ट्री में टेबलर फॉर्म में तैयारी करें और उसे रिवाइज करते रहें। बायोलॉजी के स्टूडेंट्स प्राय: फिजिक्स के प्रति लापरवाही बरतते हैं, इससे बचते हुए फिजिक्स पर पूरा ध्यान दें। फिजिक्स में इम्प्रूवमेंट होगा, तो इससे केमिस्ट्री के न्यूरेकिल्स भी सुधरेंगे। परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्न 10 से 12वीं कक्षा के पाठ्यक्रम पर आधारित होते हैं। ऐसे में एनसीईआरटी की किताबों को दोहराना न भूलें। सामान्य ज्ञान की तैयारी समाचार पत्रों और पत्रिकाओं के जरिए की जा सकती है। यह ध्यान रखें कि इस प्रवेश परीक्षा में निगेटिव मार्किग का प्रावधान भी रखा गया है, ऐसे में बेहतर यही होगा कि अंदाजा लगाते हुए किसी प्रश्न का उत्तर न दें। गलत उत्तर देने पर आपके अंक काट दिए जाएंगे, इसलिए जो प्रश्न आपको अच्छी तरह आते हों, उन्हीं के उत्तर दें। यदि आप इस तरह की रणनीति बनाकर किसी भी परीक्षा की तैयारी करते हैं, तो सफल हो सकते हैं।
 
केयरिंग डॉक्टर की छवि जरूरी
मरीजों को समझने की क्षमता नहीं होगी तो एक केयरिंग डॉक्टर की छवि नहीं बन पाएगी, क्योंकि इसी से मरीजों को भरोसा मिलता है। डॉक्टर को तो ऐसा होना ही चाहिए कि वह एक तरफ तो बीमारों की उम्मीदों पर खरा उतरे, तो दूसरी तरफ नाउम्मीदी वाले केसों के बिगडने पर तीमारदारों के गुस्से को भी अपनी समझ-बूझ से निपटा सके। इसके अलावा निर्णय लेने की क्षमता, चीजों को जोडकर देखने की काबिलियत और मेडिकल क्षेत्र में क्या हो रहा है, यह जानने की ललक होनी चाहिए। आप इन सभी बातों को अपने अंदर देखते हैं तो आपके लिए यह प्रोफेशन बेस्ट है।   
साभार : दैनिक जागरण

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